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।। सिद्धार्थनगर में स्वास्थ्य विभाग की खुली आंखें और बंद कान; डुमरियागंज में अवैध अल्ट्रासाउंड का ‘मायाजाल’, हाईकोर्ट पहुंची शिकायत ।।

।। डिग्रियों का खेल और रसूख की ढाल: फैज सेंटर पर बिना पंजीकरण चल रही मशीन, वीडियो साक्ष्य ने खोली अवैध संचालन की पोल ।।

अजीत मिश्रा (खोजी)

।। नियमों की ‘भ्रूण हत्या’ करता फैज अल्ट्रासाउंड: अप्रशिक्षित हाथों में मशीन, रसूख के दम पर उड़ रही कानून की धज्जियां।।

उत्तर प्रदेश।

सिद्धार्थनगर।। जनपद के स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे डुमरियागंज में ‘मौत का खेल’ और ‘कानून का मखौल’ खुलेआम उड़ाया जा रहा है। डुमरियागंज स्थित फैज अल्ट्रासाउंड सेंटर पर PCPNDT एक्ट 1994 की जिस तरह से धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, उसने जिले के स्वास्थ्य महकमे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि यहाँ मरीजों की सेहत और कानून दोनों को ताक पर रखकर एक अप्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा स्कैनिंग का गोरखधंधा चलाया जा रहा है।

⭐वीडियो ने खोली पोल: डॉक्टर नदारद, ‘फैजान’ के हाथ में कमान

शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और वीडियो दावों ने सनसनी फैला दी है। बताया जा रहा है कि केंद्र पर पंजीकृत डॉक्टर की अनुपस्थिति में ‘फैजान’ नामक एक अप्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा धड़ल्ले से अल्ट्रासाउंड किया जा रहा है। सवाल यह उठता है कि क्या एक अनपढ़ या अप्रशिक्षित व्यक्ति के हाथ में जीवन-मरण का फैसला करने वाली मशीन देना अपराध नहीं है? अस्पताल अधीक्षक से हुई बातचीत में भी मौके पर अधिकृत डॉक्टर के न होने की बात पुष्ट होने का दावा किया गया है, जो इस अवैध खेल की तस्दीक करता है।

⭐डिग्रियों का ‘मायाजाल’ और कागजी हेरफेर

जांच की आंच से बचने के लिए सेंटर पर डिग्रियों का खेल भी पुराना है। शिकायत के मुताबिक, पूर्व में यहाँ डॉ. तारिक हसन की डिग्री के आधार पर पंजीकरण दिखाया गया था, जिसे बाद में संदिग्ध परिस्थितियों में हटा लिया गया। वर्तमान में केंद्र के पास वैध पंजीकरण है या नहीं, यह जांच का विषय है, लेकिन शिकायतकर्ता का सीधा आरोप है कि यह सेंटर अब बिना किसी वैध आधार के केवल ‘सेटिंग’ के भरोसे चल रहा है।

⭐हाईकोर्ट की चौखट तक पहुंचा मामला

स्वास्थ्य विभाग की सुस्ती को देखते हुए अब यह मामला माननीय उच्च न्यायालय में जनहित याचिका के जरिए पहुंच चुका है। जब जिले के जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद में सोए हों, तब न्यायालय की शरण लेना ही अंतिम विकल्प बचता है। अब देखना यह है कि न्यायालय के डंडे के डर से स्वास्थ्य विभाग जागता है या फिर रसूखदारों के आगे नतमस्तक होकर अपनी साख दांव पर लगा देता है।

⭐मुख्य मांगें:

👉PCPNDT एक्ट के तहत सेंटर का पंजीकरण तत्काल निरस्त हो।

👉अवैध रूप से चल रही अल्ट्रासाउंड मशीन को अविलंब सीज किया जाए।

👉मरीजों की जान जोखिम में डालने वाले ‘फर्जी ऑपरेटर’ और संचालक पर FIR दर्ज हो।

बड़ा सवाल: क्या सीएमओ सिद्धार्थनगर इस ‘अवैध फैक्ट्री’ पर बुलडोजर चलाएंगे या फिर जांच की फाइलों में इस मामले को भी दफन कर दिया जाएगा?

🚨PCPNDT एक्ट 1994 के तहत क्या हो सकती है कार्रवाई?

🚨धारा 3A: बिना वैध पंजीकरण के अल्ट्रासाउंड केंद्र चलाना गैर-जमानती अपराध है।

🚨अकुशल संचालन: मशीन का संचालन केवल पंजीकृत रेडियोलॉजिस्ट या प्रशिक्षित डॉक्टर ही कर सकता है। किसी ‘अप्रशिक्षित’ द्वारा स्कैन करना कानूनन जुर्म है।

🚨सजा का प्रावधान: दोष सिद्ध होने पर 3 से 5 साल तक की जेल और 50,000 से 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है।

🚨सीजिंग: नियमों के उल्लंघन पर जिला समुचित प्राधिकारी को मशीन तुरंत ‘सीज’ करने का अधिकार है।

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